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महाभारत पौराणिक कथा नहीं - भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता नीलेश ओक ने की महाभारत काल की सटीक गणना


महाभारत  पौराणिक कथा नहीं - भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता नीलेश  ओक ने की महाभारत काल की सटीक गणना 

 महाभारत केवल एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि भारत का वास्तविक इतिहास है। सदियों से विद्वान इस बात पर शोध कर रहे हैं कि महाभारत का युद्ध वास्तव में कब लड़ा गया था। इस खोज में भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता नीलेश नीलकंठ ओक का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने अपने गहरे अनुसंधान से महाभारत की एक ऐसी तिथि (डेटिंग) सामने रखी है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। नीलेश ओक के शोध 

के अनुसार, महाभारत का युद्ध 3067 ईसा पूर्व (3067 BCE) में हुआ था।

नीलेश ओक ने अपने इस निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए किसी काल्पनिक कहानी का सहारा नहीं लिया, बल्कि उन्होंने पूरी तरह से आधुनिक विज्ञान और खगोल विज्ञान (Astronomy) का उपयोग किया है। महाभारत ग्रंथ में महर्षि वेदव्यास ने युद्ध के समय के ग्रहों, नक्षत्रों, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की स्थिति का बहुत बारीक वर्णन किया है। नीलेश ओक ने इन सभी खगोलीय वर्णनों को इकट्ठा किया और उन्हें आधुनिक 'प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर' (Planetarium Software) में डाला। इस सॉफ्टवेयर की मदद से उन्होंने हजारों साल पीछे जाकर आकाश की सटीक स्थिति का अध्ययन किया।
उनके शोध का सबसे बड़ा और अचूक प्रमाण है—'अरुंधति-वसिष्ठ' अवलोकन (Arundhati-Vasistha Observation)। खगोल विज्ञान के नियम के अनुसार, आकाश में वसिष्ठ तारा हमेशा अरुंधति तारा के आगे चलता है। लेकिन महाभारत के भीष्म पर्व में व्यास जी ने लिखा है कि उस समय अरुंधति तारा, वसिष्ठ तारे के आगे चल रहा था। यह एक बहुत ही अजीब और दुर्लभ खगोलीय घटना थी। नीलेश ओक ने सॉफ्टवेयर के जरिए गणना की तो पता चला कि इतिहास में ऐसा केवल 11091 ईसा पूर्व से 4508 ईसा पूर्व के बीच ही संभव था। इसी आधार पर उन्होंने साबित किया कि महाभारत का युद्ध 4508 ईसा पूर्व से पहले ही हुआ होगा।
इसके बाद, उन्होंने महाभारत में दर्ज अन्य 100 से अधिक खगोलीय संदर्भों का मिलान किया। इनमें भीष्म पितामह के प्राण त्यागने का समय (उत्तरायण), युद्ध के समय के ग्रहण और ग्रहों की वक्री चाल शामिल थी। जब इन सभी कड़ियों को जोड़ा गया, तो केवल एक ही सटीक तारीख निकलकर सामने आई—16 अक्टूबर 3067 ईसा पूर्व। इसी दिन महाभारत का युद्ध शुरू हुआ था।
नीलेश ओक का यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिमी विद्वानों के उन दावों को खारिज करता है, जो कहते थे कि महाभारत केवल 1000 या 1500 ईसा पूर्व की घटना है। ओक के वैज्ञानिक प्रमाणों ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सभ्यता और हमारा इतिहास हजारों साल पुराना और बेहद समृद्ध है। उनका यह काम प्राचीन भारतीय ग्रंथों की प्रामाणिकता पर विज्ञान की एक मजबूत मुहर लगाता है।
Dating of Mahabharata- Watch on Prachyam.com

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